बृहस्पति को गुरु भी कहा जाता है I बृहस्पति ग्रहों में सबसे बड़ा ग्रह है I यह पीले रंग का प्रतिनिधित्व करता है I जिन लोगों की कुंडली में गुरु का प्रभाव अधिक होता है वे अध्यापक, वकील, जज, पंडित, प्रकांड विद्वान् या ज्योतिषाचार्य हो सकते हैं I सोने का काम करने वाले सुनार, किताबों की दुकान, आयुर्वेदिक औषधालय, पुस्तकालय, प्रिंटिंग मशीन आदि पर गुरु का अधिकार होता है I गुरु एक नैसर्गिक शुभ ग्रह है तथा यह जहाँ भी बैठता है उस स्थान को पवित्र कर देता है I

धर्म स्थान में कार्यरत प्रमुख व्यक्ति इसी से संचालित होते हैं I सभी तीर्थस्थल इसी ग्रह के अंतर्गत आते हैं I पूर्ण रूप से ब्राह्मण धर्म का पालन करने वाले पंडित, न्यायपालिका के अंतर्गत आने वाले सर्वोच्च पद यानी न्यायाधीश, सरकारी वकील, साधू संतों में प्रमुख, कागज़ का व्यापार करने वाले व्यापारी तथा गजेटेड अधिकारी गुरु द्वारा ही संचालित होते हैं I

गुरु से प्रभावित व्यक्ति हृष्ट पुष्ट या थोड़े मोटे हो सकते हैं I इनका शरीर विशाल होता है I ये झूठ आसानी से नहीं बोल सकते अपितु बात को घुमा फिर कर बोलते हैं I इनका क्रोध पर पूर्ण नियंत्रण होता है I यह लोग तामसिक प्रवृत्ति के नहीं होते I इनका चरित्र तथा आचरण पवित्र तथा सहज होया है I ये झूठी प्रशंसा, दिखावे से दूर रहने वाले तथा धार्मिक कार्यों में रूचि रखने वाले होते हैं I

यही कारण है कि गुरु जिस ग्रह को देखेगा वह भी बलवान हो जाएगा I
पाप ग्रह के साथ होने पर वकील जो कि झूठ की राह पर ही चलता है, भ्रष्ट नेता, सोने का स्मगलर, रिश्वतखोर अधिकारी, तांत्रिक बना सकता है

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