शनि से भली भांति सब परिचित हैं I शनि एक राशि में अढाई वर्ष तक रहता है I यह जब भी किसी राशि में आता है तो उस राशि को ही नहीं बल्कि उसके आगे तथा पीछे की राशि पर भी अपना पूरा प्रभाव डालता है I इसी विशेषता के कारण इस की साढ़े सात वर्ष की गणना की जाती है जिसे शनि की साढ़े साती कहते है I
वास्तव में यह साढ़े सात वर्ष लोगों को भयभीत ज्यादा करते हैं जबकि मैंने अपने अनुभव से सीखा है कि इन्ही सात वर्षों में व्यक्ति को सत्य का ज्ञान होता है अढाई अढाई वर्ष के तीन चक्र व्यक्ति के जीवन को कुछ इस तरह से प्रभावित करते हैं :-
साढ़े साती के पहले अढाई वर्ष में व्यक्ति कर्ज में डूब जाता है या फिर खर्च इतना हो जाता है कि व्यक्ति के पास कुल जमा पूँजी बिलकुल ख़त्म हो जाती है I तब व्यक्ति को अपने मित्रों या रिश्तेदारों से मदद कि उम्मीद होती है जो कि न के बराबर मिलती है यानी पहला सच तो यही है कि मुसीबत के वक्त कौन काम आता है इसी समय पता चलता है I मित्रों तथा रिश्तेदारों कि असलियत इसी समय पता चलती है I
घर में कोई बुजुर्ग हो तो यह समय उसके वियोग का हो सकता है या फिर घर में किसी बीमार व्यक्ति पर इतना अधिक खर्च होता है कि सारा बजट गड़बड़ा जाता है I मृत्यु भी एक शाश्वत सत्य है यह व्यक्ति को इसी समय पता चलता है I
दूसरे अढाई वर्षों में व्यक्ति को मेहनत बहुत अधिक करनी पड़ती है I इस समय में व्यक्ति अपने मित्रों से दूर होता चला जाता है I पति पत्नी के बीच मनमुटाव भी उत्पन्न हो जाता है I
इसी समय पता चलता है कि हम हम कर्म करेंगे तभी फल मिलेगा I यह भी एक सत्य है I किसी से सहायता कि उम्मीद लगाना बेकार साबित होता है तथा अंत में वही लोग काम आते हैं जिनकी बुरे समय में आपने मदद कि होती है I
तीसरे चक्र यानी साढ़े साती के पांच साल बाद का समय सबसे अधिक दुष्कर होता है I व्यक्ति आर्थिक समस्याओं से ग्रस्त हो जाता है I घर में किसी सदस्य की मृत्यु के कारण वियोग सहन करना पड़ता है I रिश्तेदारी में किसी न किसी कि मृत्यु का दुखद समाचार मिलता है I वाहन या घर इस समय बेचने पर बहुत अधिक नुक्सान उठाना पड़ता है I लाभ के सभी रास्ते बंद हो जाते हैं I व्यक्ति का जीवन अभाव और समस्याओं से भर जाता है I इसी समय पता चलता है कि बुरे समय के लिए बचा कर रखा धन कितना महत्वपूर्ण होता है I आपके पिछले कुछ सालों में किये गए बुरे कर्मों को भोगने का यही समय होता है I
इस तरह शनि केवल वही देता है जो आपने अपने लिए संजो कर रखा होता है I अगर आपने अच्छे कर्म किये तो आपको साढ़े साती के अंत में कुछ न कुछ अच्छा जरूर मिलता है I
हैरानी की बात यह है कि हर व्यक्ति केवल सुख ही चाहता है I दुःख और सुख को समान समझने वाले व्यक्तियों को शनि से डरने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती I शनि स्वयं दरिद्र व्यक्ति, बीमार, बूढ़े तथा असहाय लोगों का प्रतिरूप है I जहां भी दुःख होता है वहां शनि कि सत्ता रहती है I उदाहरण के लिए सरकारी अस्पताल तथा कारावास I शनि वास्तव में न्यायाधीश है तथा सबको तोल तोल कर न्याय देता है इसलिए शनि से अगर डर लगे तो अच्छे कर्म करके शनि को मनाएं न कि बुरा समय आने पर उसकी पूजा करें I
मैंने देखा है कि तरह तरह के उपाय लोग करते हैं परन्तु विद्वान लोगों से मेरा आग्रह है कि शनि के सत्य से लोगों को परिचित कराएँ इसी में सबकी भलाई है I
शनि से सम्बंधित उपाय करने का एक समय होता है I वास्तव में ये उपाय हमें कुछ भी बुरा करने से रोक देते हैं या हमारे कर्मों को शुद्ध कर देते हैं I यही सत्य है I
