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रत्न धारण करने से पहले | Print |  E-mail
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Thursday, 02 June 2011 19:54

भाग्यशाली रत्न इन दिनों काफी प्रचलित हैं ! रत्नों से कितना फायदा होता है ये तो रत्ना धारण करने वाला ही जान सकता है ! रत्न अपने स्वामी को लाभ तो पहुंचाते ही हैं अपितु कई रत्न तो खतरा आने से पहले ही उसकी जानकारी दे देते हैं ! जैसे की तिकोना मूंगा अपना रंग बदल कर स्वस्थ्य के बारे मैं शुभ अशुभ की जानकारी दे देता है ! गार्नेट जो कि रंग बदलने के लिए काफी प्रसिद्ध है ! कई रत्न दुर्घटना होने पर उसे अपने ऊपर ले लेते हैं ! ऐसी स्थिति मैं रत्न टूट जाता है और उसके स्वामी को मामूली सी चोट लगती है ! इस तरह के कई मामले देखने मैं आये हैं !

रत्नों की भी कुछ समयावधि होती है अर्थात वे एक निर्धारित समय तक ही अपना प्रभाव दिखाते हैं ! उसके बाद उनका ना तो कोई लाभ होता है न ही हानि !

आजकल हर जौहरी की दूकान पर एक चार्ट लगा होता है जिस पर राशी से सम्बंधित रत्नों के नाम लिखे होते हैं ! कई लोगों को तो अपनी राशी भी ठीक से पता नहीं होती और वे रत्न अपने प्रचलित नाम के आधार पर ही धारण कर लेते हैं ! नुक्सान होने की स्थिति मैं वे ज्योतिष को ही दोषी मान लेते हैं या फिर नया प्रयोग करते हैं ! जो भी हो एक बात तो निश्चित तौर पर कही जा सकती है वो यह कि रत्न धारण करने से पहले जिस रत्न को हम धारण करने जा रहे हैं उसकी भी कुछ मर्यादाएं होती हैं जिनका ध्यान अवश्य रखना चाहिए !

  • पुखराज धारण करने वाले व्यक्ति को शराब तथा मांस का सेवन नहीं करना चाहिए !किसी भी रत्न को राहू काल मैं धारण नहीं करना चाहिए !
  • रत्न धारण करने से पहले यह देख लेना चाहिए की रत्न मैं दरार या रत्न का कोई हिस्सा टुटा हुआ तो नहीं है क्योंकि रत्न बनाते वक्त रत्न अक्सर थोड़े टूट जाते हैं !मोती चांदी के अतिरिक्त किसी अन्य धातु मैं नहीं पहनना चाहिए !
  • रत्नों को धारण करने से पहले उन्हें गंगाजल से जरूर धोना चाहिए !
  • किसी रत्न को धारण करने से पहले उनका वजन अवश्य देखना चाहिए ! मोती ४ रत्ती, मूंगा ८ रत्ती, मानिक ७ रत्ती, पन्ना ६ रत्ती, पुखराज ४ रत्ती, नीलम ५ रत्ती, गोमेद ५ रत्ती तथा लहसुनिया ५ रत्ती से कम हो तो उनका प्रभाव न्यून होता है !

 

Comments  

 
0 #1 ARCHANA 2011-07-12 11:36
KISH HATH ME MUJE MUGA PEHNE
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