केतु राहू की तरह एक छाया ग्रह है I यह राहू का सहायक है I इसके सभी गुण मंगल की तरह हैं I यह शुभ ग्रह के साथ बैठा हो तो उसके फल को कई गुना बढ़ा देता है I फोड़े फुंसी, कील मुहांसे, मछली, धुआं, सिगरेट, भीड़ का सबसे पिछला हिस्सा, पर्वतों की चोटी, खाई, मकान में आई दरार, कुत्ता, दरियाई घोड़ा, भांजा, भतीजा, साला इन सबका कारक केतु ही होता है I अगर आपका कालसर्प योग है तो इस योग में जो भी कुछ अच्छा होता है केतु के ही कारण होता है I

केतु मन्त्र का भी कारक है I इससे सम्बंधित व्यक्ति मन्त्र जानते हैं व मन्त्रों से अनेकों काम सिद्ध कर लेते हैं I सभी सफल तांत्रिक केतु के शुभ प्रभाव के कारण ही सफल हो पाते हैं I चिता की बची हुई राख पर केतु का अधिकार है I

केतु Underworld है I बारूद के ढेर, जली हुई वस्तु, चितकबरी गाय, दो रंग की सभी वस्तुओं पर केतु का अधिकार है I
केतु कुंडली में अशुभ होने पर व्यक्ति के कानों पर असर पड़ता है I

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