सूर्य यंत्र – सूर्य की दशा हो या सूर्य का प्रकोप हो तो व्यक्ति कि हड्डियों से आवाज आने लगती है I मनोबल क्षीण हो जाता है I जीने की आस खत्म हो जाती है I सिर के बाल उड जाते हैं I माणिक से भी राहत न मिल रही हो तो सूर्य यंत्र का प्रयोग करें I सूर्य यंत्र के समक्ष एक माला ॐ घृणि सूर्याय नमः का नित्य पाठ करें और सूर्य को अर्ध्ये दें I इस उपाय से खोया हुआ आत्मविश्वास जाग उठता है I मेरे एक परिचित जो कि नौकरी से सस्पैंड हो चुके थे, इस उपाय का लाभ उठा चुके हैं I

सूर्य यंत्र के सम्मुख सूर्य मंत्र की एक या तीन माला प्रतिदिन जप करें I सूर्य का बुरा प्रभाव नष्ट हो जाएगा I

चंद्र यंत्र – चंद्रमा के कुंडली मे कमजोर होने से नजला जुकाम की शिकायत बनी रहती है I नजर का कमजोर होना चंद्रमा के दुष्प्रभाव से होता है I दिमागी कमजोरी या पागलपन भी चंद्रमा के ही कारण होता है I यदि चंद्रमा कम अंशों मे हो या कमजोर, पाप ग्रह से ग्रस्त, अस्त या क्षीण हो तो 11 रत्ती का मोती धारण करना चाहिए I मोती से लाभ न होने की दशा मे चंद्र यंत्र को प्रयोग किया जा सकता है I
चंद्र यंत्र का भी पूजन नित्य आवश्यक होता है I

ॐ श्रां श्रीं श्रों स: चन्द्र्मसे नमः इस मंत्र से चंद्र यंत्र के समक्ष एक या तीन माला का जाप करें I

मंगल यंत्र – मंगल के कुप्रभाव के कारण व्यक्ति का रक्त दूषित होता है I लड़ाई झगड़े मे चोट दुर्घटना accident आदि मंगल के दुष्प्रभाव से ही घटित होते हैं I खून मे कमी I मंगलीक योग हो I मूंगा पहनने से भी काम न बने तो मंगल यंत्र का प्रयोग करना चाहिए I मंगल यंत्र के सामने ॐ क्रां क्रीं क्रों स: भौमाय नमः का एक या तीन माला जप करना चाहिए I

बुध यंत्र – बुध वाणी का कारक है I इसके कुप्रभाव से व्यक्ति तुतला कर बोलता है या बोलते वक्त अटकता है I यदि बुध कमजोर है तो आप तुरंत निर्णय नहीं ले पाएंगे I बुध क्षीण है तो आप पढ़ाई मे दिक्कत आती है I बुद्धि कमजोर होती है I व्यक्ति भोला भाला या ऐसा होता है जिसे कोई भी कभी भी ठग सकता है I जीवन मे आवश्यक चातुर्य की कमी होती है I यदि पन्ना पहनना संभव न हो या पन्ना रास न आए तो बुध यंत्र को प्रयोग मे लाया जा सकता है I प्रतिदिन बुध यंत्र के समक्ष ॐ ब्रां ब्रीं ब्रों स: बुधाय नमः की एक माला का जाप करें I

गुरु / बृहस्पति यंत्र – गुरु के कुप्रभाव के से व्यक्ति अधार्मिक, नास्तिक, पापकर्म करने वाला, धूर्त, झूठ बोलने वाला होता है I

व्यक्ति दूसरों के लिए मनहूस होता है I जहां जाता है उसके साथ कुछ न कुछ बुरा हो जाता है I ऐसा व्यक्ति शराबी या नशे का आदि होता है I भाग्य उसका साथ कभी नहीं देता है I भाग्यहीन ऐसा जातक जो भी करता है उसके उसका परिणाम उल्टा ही होता है I
स्त्रियॉं की कुंडली मे गुरु पति का कारक होता है I गुरु के दुष्प्रभाव से दाम्पत्य जीवन सुखद नहीं रहता I
बृहस्यती यंत्र / गुरु यंत्र द्वारा गुरु के कुप्रभाव को शांत किया जा सकता है I इसके लिए गुरु के मंत्र से गुरु यंत्र के समक्ष ॐ ग्रां ग्रीं ग्रों से गुरवे नमः का जाप नित्य एक माला आवश्यक है I

शुक्र यंत्र – शुक्र व्यक्ति के दाम्पत्य का कारक होता है I शुक्र से स्त्री, विवाह आदि का विचार किया जाता है I शुक्र यदि कुंडली मे कमजोर हो तो व्यक्ति के पास पैसा होते हुए भी वह उसका उपयोग नहीं कर पाता I सुख सुविधाओं का जीवन मे अभाव सा रहता है I पत्नी से नहीं बनती या पत्नी से सुख का अभाव होता है I बहुत अधिक क्षीण शुक्र के कारण तलाक हो जाता है या तलाक लाख जतन करने के बाद भी नहीं मिल पाता I प्रेमिका से दूरी या बिछड़ना, प्रेम विवाह मे मुश्किलें या कभी विवाह संभव ही नहीं हो पाता I स्त्रियॉं से मतभेद या बार बार कन्या संतान का होना शुक्र के ही कुप्रभाव से होता है I शुभ काम करते वक्त अपशकुन का होना संकेत है शुक्र के विपरीत होने का I

शुक्र को अनुकूल बनाने के लिए हीरा धारण किया जाता है परंतु हीरा महंगा होने के कारण हर व्यक्ति के वश की बात नहीं कि वो हीरा पहन ले I ऐसी स्थिति मे उपरत्न जैसे कि सफ़ेद तुरमली, जेरकन, सफ़ेद मूंगा काम मे लाया जा सकता है परंतु मेरे विचार मे उपरत्न उतना काम नहीं करते जितना अपेक्षित होता है इसलिए यंत्र का प्रयोग सर्वोपयुक्त होता है I शुक्र यंत्र को पूजा घर मे स्थापित कर के शुक्र यंत्र के समक्ष एक या तीन माला निम्न मंत्र की प्रतिदिन करें
ॐ द्रां द्रीं द्रों स: शूक्राय नमः

शनि यंत्र – शनि यदि विपरीत हो तो घर मे कोई पालतू पशु की मृत्यु हो जाती है I शनि के कुप्रभाव के कारण व्यक्ति अनेक प्रकार की समस्याओं से घिर जाता है I जेल हो जाना, घर मे किसी वृद्ध की मृत्यु हो जाना, आर्थिक तंगी या कर्ज, लंबी बीमारी, गठिया, ऐसा रोग जिसका पता न चल सके, ऐसी जमीन जिसे न बेचा जा सके न रखा जा सके शनि के कुप्रभाव के कारण ही ऐसी स्थिति बनती है I शनि के तुरंत उपचार हेतु नीलम धारण करें I नीलम पहनना संभव न हो सके तो गार्नेट, नीला जिरकन, नीली आदि धारण किया जा सकता है I यदि रत्नों द्वारा लाभ न हो तो प्राण प्रतिष्ठित शनि यंत्र को शनिवार के दिन पूजा घर मे स्थापित करके निम्न मंत्र की कम से कम तीन माला रोज जाप करें I
ॐ प्राँ प्रीं प्रों स: शनेश्च्राय नमः I

राहू यंत्र – राहू यदि कुप्रभाव दे रहा हो तो घर मे शुभ कार्य नहीं होते हैं I घर मे किसी को शराब की बुरी लत लग जाती है I नशे की आदत का कारण राहू ही है I घर मे चोरी होना, दुधारू पशु की मृत्यु, पशु खो जाना, किसी पालतू पशु की जहर से मृत्यु, कोई बहुमूल्य वस्तु या दस्तावेज़ खो जाना, संपत्ति का क्षय, हाई ब्लड प्रैशर, मृत संतान या संतान पर कोई संकट आदि का कारक होता है I
राहू के कुप्रभाव की शांति के लिए गोमेद धारण करना कल्याणकारी रहता है I यदि गोमेद Suit न करे तो राहू के यंत्र के समक्ष अग्रलिखित मंत्र की कम से कम तीन माला का पाठ प्रतिदिन करना चाहिए I
ॐ भ्राँ भ्रीं भ्रों स: राहवे नमः I

केतू यंत्र – घर मे किसी दीवार मे दरार आ जाये तो केतू का बुरा प्रभाव चल रहा है समझना चाहिए I केतू के खराब प्रभाव के कारण व्यक्ति ऊंचाई से गिरता है I करंट का लगना, किसी निर्जन स्थान पर मृत्यु, खाई मे गिरना, एक्सिडेंट, शीशे से चोट लगना, मकान की छत का गिरना, किसी फोड़े या फुंसी का नासूर बन जाना, किसी अंग को काटने की नौबत आ जाना, दवाई का रिएक्शन कर जाना आदि परिणाम होते हैं I कुत्ते का काटना, रेबीज रोग, पागलपन आदि केतू के ही कारण होते हैं I

केतू के बुरे प्रभाव को शांत करने के लिए Cats Eye Stone यानि लहसुनिया धारण करना चाहिए I यदि रत्न धारण करने से लाभ न हो तो केतू यंत्र द्वारा केतू को तुरंत शांत किया जा सकता है I

केतू यंत्र के समक्ष केतू के मंत्र की कम से कम तीन माला रोज पाठ करना चाहिए I केतू मंत्र इस प्रकार है I
ॐ स्रा स्री स्रों स: केतवे नमः I

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