मंगल
मंगल ग्रह को पृथ्वी का पुत्र कहा जाता है I ग्रहों में मंगल का महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है I हमारे शरीर में मंगल रक्त में निवास करता है I जो व्यक्ति खेलकूद जैसे कि कुश्ती, क्रिकेट, बाक्सिंग आदि के खिलाड़ी होते हैं वे मंगल के अधीन आते हैं I सेना में अधिकारी, पुलिस, सर्जन इत्यादि मंगल के अधीन होते हैं I मंगल के साथ शनि का संयोग व्यक्ति को डाक्टर बनाता है यदि मंगल अधिक बलवान हो तो वह सफल डाक्टर बनता है तथा उसका कार्य चीरफाड़ से सम्बंधित होता है I शनि अगर अधिक बलवान हो तो दोनों के संयोग से कारावास या जेल से सम्बंधित आजीविका होती है I इस सन्दर्भ में बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि शनि व मंगल किस नक्षत्र में हैं और उनके अंश कितने हैं या उनका बल कितना है दोनों में से कौन अधिक बलवान है I मंगल व शनि को एक दूसरे का शत्रु माना जाता है परन्तु एक साथ जन्म कुंडली में इन दोनों के किसी भी स्थान में बैठे होने से बहुत से योग बनते तथा बिगड़ते हैं I अगर दोनों साथ बैठे हैं तो समझ लेना चाहिए कि मांगलिक योग होगा भी तो उसका प्रभाव कम हो जाएगा I फिर भी ऐसे जातक जातिका का विवाह मंगलीक से ही होना चाहिए I
राहू मंगल के संयोग से व्यक्ति जासूस बनता है I मंगल अधिक बलवान हो तो निश्चित ही व्यक्ति सफल जासूस होता है या फिर किसी गुप्तचर एजेंसी में कार्यरत होता है I राहू के बलवान होने कि स्थिति में मंगल को नुक्सान पहुंचता है व मंगल राहू के योग से जुए या शराबखाने में, हथियारों की फैक्ट्री में काम करता है I ऐसा व्यक्ति गद्दार, आतंकवादी, चोर, मुखबिर, धोखेबाज तथा कातिल हो सकता है I
चन्द्र मंगल के योग वाला व्यक्ति नेवी में अफसर होता है I मंगल का अधिक बलवान होना तथा चन्द्र का भी मित्र राशी में होना इस योग के लिए आवश्यक है I अभिप्राय यह है कि चन्द्र पानी का तथा मंगल सेना का प्रतिनिधित्व करते हैं I अगर इन दोनों के योग से व्यक्ति कुछ बनता है तो मंगल बलवान होने की स्थिति में वह जलसेना में तथा चन्द्र बलवान होने पर समुद्री जहाज में अपनी आजीविका प्राप्त करता है I वह प्रयोगशाला में वैज्ञानिक (चन्द्र के बहुत अधिक बलवान होने पर) या ब्लड बैंक में डाक्टर हो सकता है I
बुध मंगल से व्यक्ति चालाक ठग या चोर बनता है I इसके लिए बुध का बलवान होना आवश्यक है I राहू का भी यदि इस योग में योगदान हो तो निश्चित ही व्यक्ति चोरों का नेता या ठग होता है I क्योंकि बुध चालाकी के लिए जाना जाता है और अगर उसे मंगल का साहस या शक्ति प्राप्त हो जाए तो उसकी हिम्मत बढ़ जाती है और चूंकि दोनों परस्पर शत्रु हैं इसलिए इन दोनों का योग व्यक्ति पर बुरा पड़ने कि संभावना बढ़ जाती है तथा राहू
इस योग में आग में घी का काम करता है I इससे नकारात्मक प्रभाव निश्चित हो जाता है और व्यक्ति बुराई कि तरफ चल पड़ता है I
गुरु मंगल व्यक्ति को सेना में ट्रेनिंग देने वाला पद दिलवाते हैं I गुरु शिक्षक होता है I उसका काम शिक्षा देना है क्योंकि वह वास्तव में गुरु है I गुरु मंगल के योग में अगर गुरु बलवान हो तो सेना या पुलिस में होते हुए भी वह आधिकारिक पद पर तैनात रहता है I गजेटेड आफिसर का पद भी गुरु कि ही देन होता है I
केतु मंगल से व्यक्ति अग्नि से सम्बंधित कार्यों में आजीविका प्राप्त करता है I
सूर्य मंगल से व्यक्ति हड्डियों का डाक्टर बन सकता है I
